भारतीय संगीत जगत को आज एक अपूरणीय क्षति हुई है। सुरों की साम्राज्ञी और दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
मल्टी ऑर्गन फेल्यर से हुआ निधन
ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने बताया कि आशा भोसले का निधन मल्टी ऑर्गन फेल्यर यानी एक साथ कई अंगों के काम करना बंद करने से हुआ। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार ने भी इसकी पुष्टि की। उनके बेटे आनंद भोसले ने आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए कहा — “मेरी माताजी का आज निधन हो गया है।”
कल हुई थीं अस्पताल में भर्ती
शनिवार, 11 अप्रैल को आशा भोसले की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी पोती जनाई भोसले ने सोशल मीडिया पर बताया था कि दादी को अत्यधिक थकान और सीने में इन्फेक्शन के कारण भर्ती कराया गया है। पर करोड़ों प्रशंसकों की दुआएं उन्हें वापस नहीं ला सकीं।
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7 दशकों का अद्वितीय संगीत सफर
8 सितंबर 1933 को जन्मी आशा भोसले ने मात्र 9 साल की उम्र में पिता को खो दिया था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बड़ी बहन लता मंगेशकर के नक्शेकदम पर चलते हुए संगीत की दुनिया में कदम रखा। 1943 में मराठी फिल्म “माझा बाल” से शुरू हुआ उनका सफर 7 दशकों से भी अधिक समय तक जारी रहा।
12,000 से ज्यादा गाने, गिनीज बुक में नाम
आशा भोसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए, जिसके लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। “चुरा लिया है तुमने”, “दम मारो दम”, “पिया तू अब तो आ जा”, “इन आँखों की मस्ती के”, “रंगीला रे” — उनके गाए गीत हर पीढ़ी की जुबान पर हैं। आर. डी. बर्मन के साथ उनकी जोड़ी ने भारतीय संगीत को एक नया आयाम दिया।
पुरस्कार और सम्मान
- 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड — बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर
- दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2000)
- पद्म विभूषण (2008)
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
अंतिम संस्कार कल शिवाजी पार्क में
आनंद भोसले ने बताया कि सोमवार सुबह 11 बजे लोअर परेल स्थित उनके निवास “कासा ग्रांडे” में उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी जा सकेगी। इसके बाद शाम 4 बजे दादर के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा — वही जगह जहाँ उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर का भी अंतिम संस्कार हुआ था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देशभर के नेताओं, कलाकारों और प्रशंसकों ने आशा ताई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। सुरों का वह जादू जो उन्होंने 7 दशकों में बुना, वह हमेशा अमर रहेगा।
