अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिनों की भीषण जंग के बाद 2 सप्ताह का युद्धविराम हुआ है — और अब दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आमने-सामने बैठने वाले हैं। दुनिया की नजरें इस वार्ता पर टिकी हैं क्योंकि इसका नतीजा न सिर्फ मध्य पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति को प्रभावित करेगा।
इस्लामाबाद में दुनिया की सबसे बड़ी राजनयिक बैठक
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद आज दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक आयोजन की गवाह बन रही है। पूरे शहर में पुलिस चौकियाँ, रोडब्लॉक और भारी सैन्य उपस्थिति ने कई मील चौड़ा सुरक्षा घेरा बना दिया है। डिजिटल होर्डिंग्स पर “द इस्लामाबाद टॉक्स” लिखा हुआ है — पाकिस्तान इस अवसर को वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक शक्ति दिखाने का मौका मान रहा है।
वार्ता में कौन-कौन शामिल है?
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल: अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं।
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ईरानी प्रतिनिधिमंडल: ईरान का 71 सदस्यीय विशाल दल इस्लामाबाद पहुँचा है, जिसमें वार्ताकार, तकनीकी विशेषज्ञ, मीडिया प्रतिनिधि और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं।
युद्धविराम की घोषणा — लेकिन जमीन पर क्या हाल है?
अमेरिका और ईरान के बीच 2 सप्ताह का युद्धविराम हुआ है, जिसने 40 दिनों के अमेरिकी-इजरायली हमलों को रोका। यह संघर्षविराम पाकिस्तान की मध्यस्थता से संभव हुआ।
हालाँकि, युद्धविराम की घोषणा के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी प्रभावी रूप से बंद है। ईरान ने बुधवार को जलडमरूमध्य फिर से बंद कर दिया, यह कहते हुए कि बेरूत पर इजरायल के बड़े हवाई हमले ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया।
होर्मुज जलडमरूमध्य — क्यों है यह इतना अहम?
- यह जलमार्ग अपने सबसे संकरे बिंदु पर केवल 34 किलोमीटर चौड़ा है, और प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल की आवाजाही इसी से होती है, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% है।
- युद्धविराम के बाद भी जलडमरूमध्य में शिपिंग लगभग ठप है। 325 टैंकरों सहित 600 से अधिक जहाज खाड़ी में फँसे हुए हैं।
- ईरान फँसे हुए जहाजों को चेतावनी दे रहा है कि बिना अनुमति और भारी शुल्क चुकाए जलडमरूमध्य से गुजरने पर हमला किया जाएगा।
ट्रम्प की सख्त चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट कहा है कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। “परमाणु हथियार नहीं — यही 99% मुद्दा है,” उन्होंने कहा।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिकी युद्धपोत सर्वश्रेष्ठ हथियारों से फिर से लैस हो रहे हैं, और यदि वार्ता विफल होती है तो उनका उपयोग किया जाएगा।
लेबनान में संघर्ष — एक और बड़ी चुनौती
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लेबनान में हमले जारी हैं। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजरायल के सबसे बड़े समन्वित हमले में कम से कम 182 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए।
ईरानी संसद अध्यक्ष गलीबाफ ने चेतावनी दी है कि जब तक इजरायल लेबनान में हमले नहीं रोकता और अमेरिका ईरान की जमी हुई संपत्तियाँ जारी नहीं करता, तब तक वार्ता शुरू नहीं हो सकती।
वार्ता में मुख्य मुद्दे क्या हैं?
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान का परमाणु हथियार न बनाने का वादा
- होर्मुज जलडमरूमध्य: जहाजों के लिए मुक्त और सुरक्षित आवाजाही
- प्रतिबंध: ईरान पर लगे सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना
- लेबनान: इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष का समाधान
- मुआवजा: युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई
आगे क्या होगा?
यदि वार्ता सफल होती है तो एक विस्तारित 45 दिन की युद्धविराम अवधि पर चर्चा होगी, जिसका लक्ष्य केवल ईरान युद्ध नहीं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में स्थिरता लाना है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा — “हमें लगभग 24 घंटों में पता चल जाएगा।” दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद पर टिकी हैं।
