बर्लिन/नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पश्चिमी देशों द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर बढ़ाए जा रहे दबाव पर कड़ा पलटवार किया है। बर्लिन ग्लोबल डायलॉग सम्मेलन में बोलते हुए, गोयल ने यूरोपीय देशों की नीति में विरोधाभास पर सवाल उठाए और स्पष्ट किया कि भारत किसी भी बाहरी दबाव में आकर कोई व्यापार समझौता नहीं करेगा, और न ही राष्ट्रीय हित को दांव पर लगाएगा।
खबर की मुख्य बातें:
- पीयूष गोयल ने 25 अक्टूबर 2025 को बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में पश्चिमी देशों पर निशाना साधा
- UK ट्रेड मंत्री क्रिस ब्रायंट के सामने रूसी तेल खरीद पर सवाल उठाए
- गोयल ने कहा: “जर्मनी अमेरिकी प्रतिबंधों से तेल के लिए छूट मांग रहा है, ब्रिटेन को पहले ही छूट मिली है”
- सवाल: “तो फिर भारत को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?”
- जब UK मंत्री ने रॉसनेफ्ट की सहायक कंपनी की छूट का तर्क दिया
- गोयल का जवाब: “हमारे पास भी तो रॉसनेफ्ट की एक सहायक कंपनी है.. फिर भारत को क्यों…”
- ब्रिटिश मंत्री की बोलती बंद हो गई
- ट्रम्प प्रशासन ने भारत के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए – कुल 50% तक पहुंचा
- भारत ने टैरिफ को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक” बताया
- EU ने तीन भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए
- अमेरिका ने रॉसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लागू किए
- गोयल ने कहा: “हम कभी भी ‘डेडलाइन’ या ‘सिर पर तनी बंदूक’ के साथ व्यापार समझौता नहीं करते”
- भारत का लक्ष्य: अगले 20-25 वर्षों में $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: 2030 तक $500 अरब का लक्ष्य
- गोयल ने जोर दिया: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
- व्यापार “विश्वास और रिश्तों” पर आधारित होता है
भरी सभा में जर्मनी और यूके की बोलती बंद
शुक्रवार (25 अक्टूबर 2025) को बर्लिन में आयोजित एक चर्चा के दौरान, पीयूष गोयल ने यूके की ट्रेड मंत्री क्रिस ब्रायंट के सामने पश्चिमी देशों पर निशाना साधा। गोयल ने यह सवाल उठाकर नेताओं को निरुत्तर कर दिया कि जब यूरोपीय देश खुद रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मांग रहे हैं, तो भारत को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
विरोधाभास पर सवाल
गोयल ने कहा, “मैंने आज के अखबार में पढ़ा कि जर्मनी अमेरिकी प्रतिबंधों से तेल के लिए छूट मांग रहा है। ब्रिटेन को तो पहले ही छूट मिल चुकी है। तो फिर भारत को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?”
UK मंत्री का जवाब और गोयल का पलटवार
जब ब्रिटिश मंत्री ब्रायंट ने यह कहकर आपत्ति जताई कि उनके देश को मिली अमेरिकी छूट केवल रॉसनेफ्ट की एक विशिष्ट सहायक कंपनी के लिए है, तो गोयल ने तुरंत जवाब दिया:
“हमारे पास भी तो रॉसनेफ्ट की एक सहायक कंपनी है.. फिर भारत को क्यों…”
गोयल के इस तीखे पलटवार के सामने ब्रिटिश मंत्री की बोलती बंद हो गई।
अमेरिका का दबाव और बढ़े हुए टैरिफ
गोयल की यह सख्त टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और उसके सहयोगी भारत पर रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने को लेकर लगातार दबाव बढ़ा रहे हैं।
टैरिफ और प्रतिबंध
पिछले महीने, ट्रम्प प्रशासन ने भारत के कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे, जिससे कुल टैरिफ लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। नई दिल्ली ने इन टैरिफ को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक” करार दिया है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि भारत जैसे देशों पर दबाव बनाने से रूस आर्थिक रूप से कमजोर होगा और यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर हो जाएगा।
यूरोपीय संघ के प्रतिबंध
इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ (EU) ने भी हाल ही में तीन भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनका संबंध रूस की सेना से बताया गया है। अमेरिका ने पिछले हफ्ते रॉसनेफ्ट और लुकोइल, रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर भी प्रतिबंध लागू किए थे।
“हम दबाव में समझौते नहीं करते”
पश्चिमी दबाव के बावजूद, पीयूष गोयल ने भारत की स्वतंत्र व्यापार नीति पर दृढ़ता से जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश किसी भी “दबाव या समयसीमा” में समझौते नहीं करता है।
कोई डेडलाइन नहीं
गोयल ने कहा, “हम कभी भी ‘डेडलाइन’ या ‘सिर पर तनी बंदूक’ के साथ कोई व्यापार समझौता नहीं करते।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई देश टैरिफ लगाता है, तो भारत नए बाजारों की तलाश करेगा, घरेलू मांग को मजबूत करेगा और दीर्घकालिक लचीलापन विकसित करेगा।
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि और $30 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
गोयल ने रेखांकित किया कि भारत के सभी व्यापारिक संबंध राष्ट्रीय हित के आधार पर तय होते हैं, न कि बाहरी दबावों पर।
स्वतंत्र विदेश नीति
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने कभी भी किसी बाहरी के कहने पर यह तय नहीं किया कि उसका मित्र कौन होगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई कल को हमसे कहे कि आप EU से संबंध न रखें या केन्या से व्यापार न करें—तो यह भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है।
महत्वाकांक्षी लक्ष्य
गोयल ने भारत की आर्थिक रणनीति का उद्देश्य साझा किया, जिसके तहत भारत का लक्ष्य अगले 20-25 वर्षों में $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना है।
उन्होंने कहा कि भारत भविष्य को ध्यान में रखकर बातचीत करता है और देश के लिए जो सबसे बेहतर सौदा होगा, वही करेगा।
विश्वास और रिश्तों पर आधारित व्यापार
पीयूष गोयल ने यह भी बताया कि व्यापार समझौते केवल टैरिफ या बाजार पहुंच तक ही सीमित नहीं होते, बल्कि वे “विश्वास और रिश्तों” पर आधारित होते हैं।
चल रही बातचीत
वर्तमान में, भारत यूरोपीय संघ और अमेरिका दोनों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का लक्ष्य 2030 तक व्यापार को $500 अरब तक पहुंचाना है।
मजबूत आर्थिक बुनियाद
सत्र के अंत में, गोयल ने भरोसा जताया कि भारत की आर्थिक बुनियाद बेहद मजबूत है। उन्होंने कहा कि भारत के पास 1.4 अरब युवा, महत्वाकांक्षी लोग हैं, और देश किसी दबाव में आकर अल्पकालिक या कमजोर सौदे नहीं करेगा।






