सतारा जिले के फलटण उप-जिला अस्पताल में कार्यरत एक युवा महिला डॉक्टर द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद महाराष्ट्र में हड़कंप मच गया है। गुरुवार देर रात भाई दूज की रात को फलटण के एक जाने-माने होटल के एक बंद कमरे में डॉक्टर का शव मिला था, जो पहले व्यक्तिगत परेशानी का मामला लग रहा था, उसने अब एक भयावह मोड़ ले लिया है। यह मामला एक बड़े घोटाले में बदल गया है क्योंकि डॉक्टर ने अपनी हथेली पर एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं।
खबर की मुख्य बातें:
- सतारा जिले के फलटण उप-जिला अस्पताल में कार्यरत महिला डॉक्टर ने आत्महत्या की
- गुरुवार देर रात भाई दूज को होटल के कमरे में शव मिला
- डॉक्टर ने अपनी हथेली पर सुसाइड नोट लिखा था
- पुलिस इंस्पेक्टर गोपाल बदने पर कई बार दुष्कर्म का आरोप
- दूसरे अधिकारी प्रशांत बांकर पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप
- डॉक्टर पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने का दबाव डाला जा रहा था
- परिवार के अनुसार महीनों से चल रहा था उत्पीड़न
- डॉक्टर ने दो-तीन महीने पहले शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई
- आत्महत्या से पहले स्थानीय सांसद ने फोन किया था – राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका
- महाराष्ट्र महिला आयोग की प्रमुख रूपाली चाकणकर ने संज्ञान लिया
- राज्य कांग्रेस नेता विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ने सरकार पर हमला बोला
- जिला प्रशासन ने होटल के कमरे को फॉरेंसिक जांच के लिए सील किया
आत्महत्या नोट में पुलिस अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप
डॉक्टर, जो मूल रूप से बीड जिले की रहने वाली थीं, ने अपने हाथ पर लिखे सुसाइड नोट में दो पुलिस अधिकारियों का नाम लिया है।
नोट में पुलिस इंस्पेक्टर गोपाल बदने पर कई बार दुष्कर्म (Rape) करने का आरोप लगाया गया है।
दूसरे अधिकारी, प्रशांत बांकर, पर मानसिक रूप से प्रताड़ित (Mentally Harassed) करने का आरोप है।
परिवार के दावे
डॉक्टर के परिवार ने दावा किया है कि उनकी बेटी की मृत्यु से पहले हफ्तों तक उन्हें यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा था। उत्पीड़न कथित तौर पर महीनों से चल रहा था, जो पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच एक मेडिकल जांच मामले को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने का ‘असहनीय’ दबाव
डॉक्टर के परिवार के आरोपों के अनुसार, उन पर एक चल रहे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को बदलने के लिए भारी दबाव डाला जा रहा था। यह दबाव कथित तौर पर स्वयं पुलिस विभाग के भीतर से आ रहा था।
डॉक्टर के चाचा ने पत्रकारों को बताया कि “उसने हमें बार-बार बताया था कि दबाव असहनीय है… कि वह अपनी जान ले सकती है”।
राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका
मृतक के चचेरे भाई ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है कि आत्महत्या से कुछ देर पहले फल्टन क्षेत्र के एक स्थानीय सांसद ने डॉक्टर को फोन किया था, जिससे राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंकाएं और गहरी हो गई हैं।
चचेरे भाई ने यह भी बताया कि डॉक्टर ने दो या तीन महीने पहले शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया: तत्काल कार्रवाई की मांग
इन सनसनीखेज खुलासों ने सतारा में आक्रोश भड़का दिया है, और आरोपी अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने और उच्च-स्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
पुलिस की प्रतिक्रिया
सतारा पुलिस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि “हमने मामला दर्ज कर लिया है, और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हम पीड़िता के हाथ पर लिखे सुसाइड नोट में लगे आरोपों की भी जांच कर रहे हैं”।
महिला आयोग का संज्ञान
महाराष्ट्र महिला आयोग की प्रमुख रूपाली चाकणकर ने इस मामले का संज्ञान लिया है और सतारा पुलिस को निर्देश दिया है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि आरोपियों की तलाश के लिए टीमें तैनात कर दी गई हैं और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
कांग्रेस का हमला
राज्य कांग्रेस नेता विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ने इस मामले को लेकर सत्तारूढ़ महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “जब रक्षक ही भक्षक बन जाए! पुलिस का काम रक्षा करना है, लेकिन अगर वे स्वयं एक महिला डॉक्टर का शोषण कर रहे हैं, तो न्याय कैसे मिलेगा?”
वडेट्टीवार ने सवाल उठाया कि जब लड़की ने पहले शिकायत दर्ज कराई थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल जांच का आदेश देना पर्याप्त नहीं है; इन पुलिस अधिकारियों को उनकी नौकरियों से बर्खास्त किया जाना चाहिए ताकि वे जांच पर दबाव न डाल सकें।
उन्होंने मांग की कि जिन लोगों ने पिछली शिकायत को नजरअंदाज किया और इन पुलिस अधिकारियों को बचाया, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
जांच की वर्तमान स्थिति
जिला प्रशासन ने फॉरेंसिक जांच के लिए होटल के कमरे को सील कर दिया है। राज्य स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं। यह मामला पुलिस द्वारा किए जा रहे अत्याचारों पर लगाम लगाने के लिए तत्काल और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करता है।






