भारत की प्रमुख एयरलाइन IndiGo में परिचालन संबंधी संकट छठे दिन भी जारी रहा, हालांकि रविवार (7 दिसंबर, 2025) को स्थिति थोड़ी सुधरती दिखी। IndiGo ने देश भर में 560 उड़ानें रद्द कीं, जबकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के हस्तक्षेप के बाद एयरलाइन ने यात्रियों को 610 करोड़ रुपये का रिफंड संसाधित किया है।
खबर की मुख्य बातें:
- 560 उड़ानें रद्द, 1,650+ उड़ानें संचालित करने का लक्ष्य
- 610 करोड़ रुपये का रिफंड और 3,000 बैग वितरित
- ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 30% से बढ़कर 75% हुई
- DGCA ने CEO और COO को कारण बताओ नोटिस जारी किया
- FDTL नियमों का पालन न करना मुख्य कारण
परिचालन में सुधार के दावे
IndiGo ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए दावा किया कि परिचालन संबंधी अराजकता कम हो रही है। एयरलाइन ने कहा कि उसका लक्ष्य दिन के अंत तक 1,650 से अधिक उड़ानें संचालित करना है, और उसने 95 प्रतिशत कनेक्टिविटी बहाल कर दी है, जो 138 में से 137 गंतव्यों तक परिचालन कर रही है। यह संख्या शनिवार को संचालित की गई लगभग 1,500 उड़ानों से अधिक थी।
IndiGo के सीईओ पीटर एल्बर्स ने कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक संदेश में कहा कि वे “धीरे-धीरे वापसी कर रहे हैं”। एयरलाइन ने यह भी बताया कि उनकी ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) में भी सुधार हुआ है, जो पिछले दिन के लगभग 30% से बढ़कर 75% हो गई है। हालांकि, यात्रियों को अभी भी असुविधा का सामना करना पड़ा और कई लोगों ने सोशल मीडिया पर देरी और सामान (बैगेज) से जुड़ी चुनौतियों के बारे में शिकायत की।
दिल्ली हवाई अड्डे के जीएमआर (GMR) ने यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान की नवीनतम स्थिति की जाँच करने की सलाह दी है, क्योंकि IndiGo की उड़ानों में अभी भी देरी हो सकती है।
सरकारी हस्तक्षेप और DGCA की कार्रवाई
MoCA ने संकट को कम करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप किया। मंत्रालय ने IndiGo को सख्त निर्देश दिए कि रद्द या गंभीर रूप से विलंबित उड़ानों के लिए सभी रिफंड आज रात 8:00 बजे तक पूरे किए जाएं, और रिशेड्यूलिंग के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाए। मंत्रालय के दबाव के परिणामस्वरूप, IndiGo ने 610 करोड़ रुपये का रिफंड संसाधित किया और 3,000 बैग भी यात्रियों तक पहुंचाए।
संकट के कारण हवाई किराए में अस्थायी वृद्धि को देखते हुए, मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से हवाई किराए पर एक सीमा (cap) लागू की।
नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि IndiGo के परिचालन संकट के कारण यात्रियों को मानसिक उत्पीड़न और परेशानी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (DGCA) ने IndiGo के सीईओ पीटर एल्बर्स और सीओओ/अकाउंटेबल मैनेजर इसिड्रो पोरक्वेरास को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। मोहोल ने कहा कि एयरलाइन द्वारा फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (FDTL) का गंभीरता से पालन न करने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
संकट का मूल कारण: FDTL नियमों का पालन न करना
इस संकट का मुख्य कारण क्रू की कमी और शेड्यूलिंग संबंधी समस्याएं थीं, जो DGCA के संशोधित उड़ान सुरक्षा मानदंडों (FDTL) को सुचारू रूप से लागू करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण पैदा हुईं। ये नियम पायलटों की थकान को दूर करने के लिए डिज़ाइन किए गए थे, जिसके तहत पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम की अवधि 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दी गई थी।
DGCA ने IndiGo पर “नियोजन, निरीक्षण और संसाधन प्रबंधन में महत्वपूर्ण चूक” का आरोप लगाया है। स्थिति को स्थिर करने के लिए, DGCA ने नए सुरक्षा मानदंडों (जैसे रात में उड़ान भरने की अधिकतम अवधि 10 घंटे और रात में लैंडिंग की संख्या) के कार्यान्वयन को अस्थायी रूप से फरवरी 2026 तक के लिए रोक दिया है।
यात्रियों की मदद के लिए रेलवे आगे आया
IndiGo संकट के बीच फंसे यात्रियों की सहायता के लिए भारतीय रेलवे (पश्चिमी रेलवे) ने विशेष ट्रेनें चलाई हैं और नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े हैं। आईआरसीटीसी ने अहमदाबाद हवाई अड्डे पर एक काउंटर भी स्थापित किया है, जहाँ यात्री सीधे भुगतान करके दिल्ली के लिए विशेष ट्रेनों के टिकट बुक कर सकते हैं।
राजनीतिक खींचतान और प्रबंधन की प्रतिक्रिया
विपक्षी नेता राहुल गांधी ने IndiGo की विफलता के लिए सरकार के “एकाधिकार मॉडल” को जिम्मेदार ठहराया, जबकि नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
इस बीच, IndiGo की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के बोर्ड ने एक संकट प्रबंधन समूह (CMG) का गठन किया है, जिसमें सीईओ पीटर एल्बर्स सहित अन्य वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं, जो स्थिति पर नज़र रख रहे हैं।
यह पूरा संकट दर्शाता है कि कैसे एक बड़ी एयरलाइन द्वारा सुरक्षा नियमों को लागू करने में बरती गई लापरवाही से न केवल यात्रियों को भारी असुविधा हुई, बल्कि बड़े पैमाने पर रिफंड और सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता भी पड़ी।







