हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी वाई पुरन कुमार की 7 अक्टूबर, 2025 को चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर हुई आत्महत्या ने गहरे सामाजिक दोषों को उजागर कर दिया है। एक बंदूक की गोली के घाव के साथ मृत पाए गए कुमार की इस दुखद घटना ने पुलिस और नौकरशाही के भीतर जातिगत विवादों को सामने ला दिया है।
खबर की मुख्य बातें:
- IPS अधिकारी वाई पुरन कुमार की 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ में आत्महत्या
- सुसाइड नोट में 16 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आरोप
- हरियाणा DGP शत्रुजीत कपूर और रोहतक SP नरेंद्र बिजारनिया सहित नाम
- जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न और अवैध निगरानी के गंभीर आरोप
- पत्नी IAS अधिकारी अमनीत पी कुमार ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
- रोहतक SP नरेंद्र बिजारनिया का तबादला किया गया
- 6 सदस्यीय SIT का गठन, जांच जारी
- सोनिया गांधी, भगवंत मान, रेवंत रेड्डी ने न्याय की मांग की
- परिवार ने पोस्टमॉर्टम पर रोक लगाई
मामला और गंभीर आरोप
आईपीएस अधिकारी वाई पुरन कुमार ने अपने “अंतिम नोट” में 16 वरिष्ठ अधिकारियों का नाम लिया था, जिनमें हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया शामिल हैं। उनकी पत्नी, आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, कुमार ने इन अधिकारियों पर लंबे समय तक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और जाति आधारित भेदभाव का आरोप लगाया था।
यह मौत रोहतक रेंज आईजी के रूप में उनके पिछले पद से सुनारिया में पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में उनके तबादले के बमुश्किल एक महीने बाद हुई है।
आत्महत्या से पहले की शिकायतें
पुरन कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पहले भी गंभीर आरोप लगाए थे।
2021 में जातिगत उत्पीड़न का आरोप
उन्होंने मई 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) मनोज यादव के खिलाफ अंबाला के पुलिस अधीक्षक के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज की थी। कुमार ने यादव पर अपनी जाति के कारण उन्हें अपमानित करने और परेशान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की थी।
भेदभाव का विशिष्ट उदाहरण
कुमार ने दावा किया था कि 3 अगस्त, 2020 को जब उन्होंने और अंबाला एसपी अभिषेक जोरवाल ने ट्रैफिक पुलिस स्टेशन शहजादपुर परिसर के अंदर एक मंदिर का दौरा किया, तो केवल उनसे ही मंदिर के लिए पूर्व अनुमति लेने के बारे में पूछताछ की गई थी।
कुमार का दावा था कि यादव ने 17 अगस्त, 2020 को उनसे स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन जोरवाल को ऐसी कोई पूछताछ निर्देशित नहीं की गई थी।
अवैध निगरानी की चिंता
आईपीएस अधिकारी ने कथित अवैध निगरानी पर भी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने दावा किया था कि 2021 में उनके मोबाइल फोन के इंटरनेट प्रोटोकॉल विवरण रिकॉर्ड (IPDR), जिसमें व्हाट्सएप कॉल विवरण, लॉग और चैट शामिल थे, कुछ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अवैध रूप से एक्सेस किए गए थे।
परिवार की माँगें और विरोध
कुमार की पत्नी, आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार ने सभी नामित अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने और गिरफ्तार करने की मांग की है। उन्होंने परिवार के लिए सुरक्षा की भी मांग की है।
मुख्य मांगें
FIR में संशोधन: उन्होंने मांग की है कि प्राथमिकी में संशोधन किया जाए ताकि “सभी आरोपियों के नाम सही ढंग से दर्शाए जा सकें”।
SC/ST एक्ट के सही प्रावधान: अमनीत कुमार ने प्राथमिकी में “कमजोर” (diluted) धाराएं शामिल करने पर आपत्ति जताई है और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के सही प्रावधानों को शामिल करने पर जोर दिया है।
पोस्टमॉर्टम पर रोक: परिवार ने इन मांगों के पूरा होने तक पोस्टमॉर्टम के लिए सहमति रोक दी है। परिवार ने शनिवार को यह भी दावा किया कि उनके परामर्श के बिना शव को पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ले जाया गया था।
सरकार और जांच दल की प्रतिक्रिया
हरियाणा सरकार ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया का तबादला कर दिया है, जो उन अधिकारियों में से थे जिनके खिलाफ कुमार की पत्नी कार्रवाई की मांग कर रही थीं।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सार्वजनिक रूप से कहा है कि चल रही जांच में दोषी पाए गए किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, चाहे उनका पद कुछ भी हो। उन्होंने यह भी कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
विशेष जांच दल
चंडीगढ़ पुलिस ने अधिकारी के सुसाइड नोट के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। जांच के लिए यूटी आईजी पुष्पेंद्र कुमार की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
चंडीगढ़ यूटी पुलिस प्रमुख सागर प्रीत हुड्डा ने परिवार की शिकायतों को दूर करने और पोस्टमॉर्टम को आगे बढ़ाने के लिए उनसे चर्चा की है। हरियाणा आईएएस अधिकारी संघ ने भी राज्य सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से कुमार की पत्नी द्वारा उठाए गए मुद्दों को “अत्यंत गंभीरता” के साथ लेने का आग्रह किया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है:
सोनिया गांधी (कांग्रेस नेता)
उन्होंने आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार को पत्र लिखकर इस मौत को “पूर्वाग्रही और पक्षपाती” रवैये की दुखद याद बताया, जो सत्ता में बैठे लोगों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को भी सामाजिक न्याय से वंचित करता है।
भगवंत मान (पंजाब के मुख्यमंत्री)
उन्होंने केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकारों से न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “परिवार न्याय की मांग कर रहा है। आप किसी एक व्यक्ति को बचाने के लिए कानून की उपेक्षा नहीं कर सकते। कानून से ऊपर कोई नहीं है। न्याय होना चाहिए”।
ए रेवंत रेड्डी (तेलंगाना के मुख्यमंत्री)
उन्होंने “जबरन मौत” पर “गहरा सदमा” व्यक्त किया और इसे “जाति के नाम पर हमलों का एक स्पष्ट उदाहरण” बताया। उन्होंने टिप्पणी की कि अगर एडीजीपी स्तर के अधिकारी को भी कथित जाति-आधारित उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, तो यह आम लोगों की दयनीय जीवन स्थितियों को दर्शाता है।






