हाल ही में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर हुए एक बड़े सिस्टम क्रैश ने देश की हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) तकनीक की बढ़ती उम्र पर एक बार फिर ध्यान खींचा है। इस तकनीकी खराबी के कारण इस सप्ताह सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुईं। यह घटना तब हुई है जब एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स गिल्ड (इंडिया) ने इस गड़बड़ी से महीनों पहले ही अधिकारियों को इस तरह की तकनीकी कमियों के बारे में चेतावनी दी थी।
खबर की मुख्य बातें:
- दिल्ली एयरपोर्ट पर AMSS सिस्टम क्रैश – 15 घंटे से अधिक disruption
- 800+ उड़ानें delayed, लगभग 100 उड़ानें cancelled
- ATC Guild ने जुलाई 2025 में ही दी थी चेतावनी
- संसदीय समिति ने भी उठाई थी चिंता – “प्रदर्शन में गिरावट”
- Controllers को करना पड़ा manual coordination – फोन और हाथ से लिखे clearances
- AI-based tools, predictive systems की कमी – global standards से पिछड़े
- नागरिक उड्डयन मंत्री ने समीक्षा की – detailed root-cause analysis का आदेश
- शनिवार तक operations normal – लेकिन modernization की urgent जरूरत
सिस्टम क्रैश और व्यापक देरी
यह गंभीर तकनीकी खराबी गुरुवार शाम को शुरू हुई और शुक्रवार सुबह 5:45 बजे तक और बिगड़ गई। इस क्रैश के कारण 15 घंटे से अधिक समय तक हवाई संचालन बुरी तरह प्रभावित रहा।
व्यापक प्रभाव
इस technical failure के कारण:
- 800 से अधिक उड़ानें विलंबित हुईं
- लगभग 100 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं
- हजारों यात्री प्रभावित हुए
- Airlines को massive rescheduling करनी पड़ी
AMSS क्या है?
यह दुर्घटना ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) में हुई। AMSS को भारत में हवाई यातायात प्रबंधन की डिजिटल रीढ़ माना जाता है।
यह सिस्टम करता है:
- पायलटों, रडार स्टेशनों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावरों के बीच उड़ान योजनाओं को स्वचालित रूप से रूट करना
- मौसम डेटा का real-time transmission
- समन्वय संदेशों का automatic exchange
- Flight clearances और coordination
जब यह backbone system fail हो जाता है, तो पूरा operation ठप हो जाता है।
Manual Operations की चुनौती
जब शुक्रवार सुबह यह सिस्टम फेल हो गया, तो:
- नियंत्रकों को उड़ान योजनाओं को मैन्युअल रूप से तैयार करना पड़ा
- फोन और हाथ से लिखे गए क्लियरेंस का उपयोग किया गया
- इस मैन्युअल प्रक्रिया ने संचालन को काफी धीमा कर दिया
- मानवीय त्रुटि के जोखिम को भी बढ़ा दिया
यह 21st century में 1980s के तरीके से काम करने जैसा था।
ATC गिल्ड की अनदेखी की गई चेतावनियाँ
गुरुवार के सिस्टम ब्रेकडाउन से महीनों पहले, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स गिल्ड (इंडिया) ने अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि देश के ऑटोमेशन सिस्टम “प्रदर्शन में गिरावट” दिखा रहे थे।
जुलाई 2025 की चेतावनी
गिल्ड ने जुलाई 2025 में सरकार और विमानन अधिकारियों को भेजे गए एक संचार में:
- दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर बार-बार धीमी गति का उल्लेख
- डेटा प्रोसेसिंग में अंतराल (lags) की शिकायत
- System performance degradation की warning
Guild की मांगें
गिल्ड ने आग्रह किया था कि:
- हवाई नेविगेशन प्रणालियों की समय-समय पर समीक्षा की जाए
- उन्हें वैश्विक मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जाए
विशेष रूप से कमी बताई गई:
- भविष्य कहनेवाले उपकरणों (predictive tools) की कमी
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित संघर्ष का पता लगाने वाले साधनों (AI-based conflict detection) का अभाव
- वास्तविक समय डेटा साझाकरण की कमी
ये सभी tools अमेरिका और पूरे यूरोप जैसे देशों में मानक हैं।
Global Benchmarks से पिछड़े
गिल्ड ने आगाह किया था कि भारत के सिस्टम को यूरोकंट्रोल और एफएए जैसे वैश्विक बेंचमार्क के साथ तालमेल बिठाना चाहिए, जिसमें:
- दक्षता और सुरक्षा मार्जिन दोनों बनाए रखने पर जोर
- Modern automation और AI integration
- Redundancy और backup systems
संसदीय समिति की गंभीर चिंताएँ
हालिया व्यवधान एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स गिल्ड और परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर संसदीय स्थायी समिति दोनों द्वारा जुलाई में उठाए गए चिंताओं के समान है।
समिति की रिपोर्ट
समिति की रिपोर्ट ने भी देश के एटीसी सिस्टम को “महत्वपूर्ण प्रदर्शन में गिरावट दिखाते हुए” बताया था।
मुख्य निष्कर्ष
समिति ने यह पाया कि:
- भारत का हवाई यातायात और हवाई क्षेत्र की जटिलता तेजी से बढ़ी है
- लेकिन तकनीकी उन्नयन की गति उसके साथ तालमेल नहीं बिठा पाई है
- पुराने सिस्टम न केवल संचालन को धीमा करते हैं
- बल्कि एयर ट्रैफिक नियंत्रकों पर “जबरदस्त अतिरिक्त संज्ञानात्मक दबाव” (enormous additional cognitive strain) डालते हैं
Controllers को उन कार्यों को मैन्युअल रूप से करने के लिए मजबूर किया जाता है जिन्हें आधुनिक सिस्टम दुनिया के अन्य हिस्सों में स्वचालित कर देते हैं।
समिति की महत्वपूर्ण सिफारिशें
- एटीसी ऑटोमेशन के लिए एक समय-सीमा वाली आधुनिकीकरण योजना
- मौजूदा सिस्टम का तकनीकी ऑडिट
- एआई-संचालित संघर्ष समाधान उपकरणों को अपनाना
Critical Warning
समिति ने चेतावनी दी थी:
“जब किसी सुरक्षा-महत्वपूर्ण प्रणाली के मानवीय और मशीन दोनों तत्व दबाव में होते हैं, तो सिस्टम का समग्र लचीलापन कम हो जाता है; इसलिए, एटीसी ऑटोमेशन का आधुनिकीकरण ‘एक महत्वपूर्ण और तत्काल आवश्यकता है’।”
यह चेतावनी अब reality बन गई है।
कार्रवाई और समाधान
Immediate Response
सिस्टम को प्रबंधित करने वाले भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण (AAI) के अनुसार:
- इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) के इंजीनियरों को सहायता के लिए बुलाया गया
- शुक्रवार रात तक समस्या का “समाधान” कर दिया गया
- शनिवार तक, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने पुष्टि की कि सभी उड़ान संचालन सामान्य हो गए हैं
- हालांकि एयरलाइंस ने बैकलॉग को क्लियर करने के लिए अपने शेड्यूल को समायोजित करना जारी रखा
Official Investigation
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने:
- AAI और उसकी एयर नेविगेशन सर्विसेज विंग से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है
- प्रारंभिक आकलन सॉफ्टवेयर और बिजली से संबंधित मुद्दों के संयोजन की ओर इशारा करते हैं
मंत्री की समीक्षा
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने शनिवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर संचालन की समीक्षा की।
उन्होंने कहा:
- AAI, ANS और ECIL की टीमों ने अथक प्रयास किया
- मैनुअल समन्वय के माध्यम से यात्री सुरक्षा सुनिश्चित की
उन्होंने निर्देश दिए:
- अधिकारियों को विस्तृत मूल-कारण विश्लेषण (root-cause analysis) करने का आदेश
- भविष्य के लिए एटीसी नेटवर्क को अधिक लचीला बनाने हेतु
- सिस्टम अतिरेक (redundancy) को बढ़ाने का निर्देश
Traffic Signal की तरह समझें ATC
एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम का आधुनिक होना किसी शहर के ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम के अपग्रेड होने जैसा है:
- यदि आप केवल सड़कों को चौड़ा करते रहें (हवाई यातायात बढ़ाते रहें)
- लेकिन ट्रैफिक सिग्नल (एटीसी तकनीक) अभी भी 1980 के दशक के मैनुअल स्विच का उपयोग कर रहे हैं
- तो थोड़ी सी भी खराबी पर पूरा शहर रुक जाएगा
एआई-संचालित सिस्टम वह स्मार्ट ट्रैफिक लाइटें हैं जो:
- ऑटोमैटिक रूप से प्रवाह को प्रबंधित करती हैं
- मानवीय थकान कम करती हैं
- दुर्घटनाओं की संभावना घटाती हैं
आगे की चुनौती
यह incident एक wake-up call है। इसने साबित कर दिया कि ATC Guild और Parliamentary Committee की चेतावनियां बेबुनियाद नहीं थीं।
अब सवाल है कि क्या:
- Immediate modernization plan implement होगा?
- AI-based systems जल्द लाए जाएंगे?
- Global standards adopt किए जाएंगे?
- Adequate redundancy build की जाएगी?
भारत का aviation sector तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अगर infrastructure उसी pace से upgrade नहीं होता, तो ऐसे disruptions बार-बार होंगे। 800+ flights की delay और 100 cancellations केवल inconvenience नहीं है – यह एक systemic failure का symptom है जिसे urgent attention की जरूरत है।






