बिहार चुनाव: महागठबंधन में बढ़ी दरार, JMM ने छोड़ा साथ; BJP ने कसा तंज, कहा ‘अहंकारी’ नेतृत्व ने बिगाड़ा खेल

बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, महागठबंधन में बड़ी दरार आ गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने सीट-बंटवारे पर असंतोष के कारण अलग होने की घोषणा की। बीजेपी ने इसे नेताओं के अहंकार का परिणाम बताया और कहा, "बिहार बच गया"। राजद और कांग्रेस के बीच 65 सीटों की मांग पर गतिरोध बना हुआ है, जबकि पहले चरण के लिए नामांकन बंद हो चुके हैं।
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, विपक्ष के महागठबंधन (Grand Alliance) में पड़ी दरारों ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया है। ताजा घटनाक्रम में, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बिहार में गठबंधन से अलग होने की घोषणा कर दी है, जिसने नेतृत्व की विफलता को उजागर करते हुए बीजेपी को कड़ी आलोचना का मौका दिया है।

खबर की मुख्य बातें:

  • JMM ने महागठबंधन छोड़ा, बिहार में स्वतंत्र रूप से लड़ेगी
  • सीट-बंटवारे में असंतोष मुख्य कारण
  • BJP ने कहा – ‘बिहार बच गया’
  • अमित मालवीय ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के ‘अहंकार’ पर निशाना साधा
  • कांग्रेस-RJD के बीच सीटों को लेकर गतिरोध
  • कांग्रेस चाहती है 65 सीटें, RJD दे रहा सिर्फ 58
  • CPI(ML) Liberation और VIP भी नाखुश
  • बछवाड़ा और राजापाकर में ‘दोस्ताना टकराव’
  • NDA ने पहले ही अंतिम कर लिया सीट-बंटवारा
  • पहला चरण 6 नवंबर, दूसरा 11 नवंबर
  • मतगणना 14 नवंबर को

जेएमएम का अलग होना: भाजपा का ‘बिहार बच गया’ वाला हमला

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने सीट-बंटवारे में संतोषजनक हिस्सा न मिलने पर बिहार चुनाव में स्वतंत्र रूप से कुछ सीटों पर लड़ने का फैसला किया है, जो महागठबंधन की गहरी आंतरिक समस्याओं का नवीनतम लक्षण है।

BJP का तीखा हमला

इस दरार को बीजेपी ने तुरंत भुनाया। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना करते हुए लिखा, “झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार में अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है और यह भी घोषणा की है कि वह अब महागठबंधन का हिस्सा नहीं है। इतना ही नहीं, पार्टी ने यह भी कहा कि बिहार चुनावों के बाद झारखंड में गठबंधन पर पुनर्विचार किया जाएगा। राहुल [गांधी] और तेजस्वी [यादव] का अहंकार ही महागठबंधन के पतन का असली कारण है। बिहार बच गया”

‘लठबंधन’ का तंज

मालवीय की यह टिप्पणी बीजेपी की उस कहानी को पुख्ता करती है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस पार्टी के नेताओं का “अहंकार” ही विपक्ष के गठबंधन को चुनाव से पहले ही ध्वस्त कर रहा है। बीजेपी, इस सार्वजनिक अव्यवस्था का फायदा उठाते हुए, महागठबंधन को केवल एक “लठबंधन” (अराजकता का गठबंधन) बताकर उपहास कर रही है।

सीट-बंटवारे की जटिल गुत्थी: कांग्रेस और राजद के बीच गतिरोध

जहां एनडीए (NDA) ने पहले ही अपने सीट-बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया है, वहीं विपक्षी गठबंधन गहन बातचीत में फंसा हुआ है, जबकि पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन बंद हो चुके हैं।

महागठबंधन में केंद्रीय गतिरोध कांग्रेस के लिए सीटों की संख्या को लेकर है।

RJD बनाम कांग्रेस

प्रमुख साझीदार RJD कथित तौर पर लगभग 58 सीटें देने पर अड़ा हुआ है, जबकि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में अपनी स्थिति का हवाला देते हुए 60 से अधिक, आदर्श रूप से 65 सीटों पर चुनाव लड़ने पर जोर दे रही है।

2020 के चुनावों में कांग्रेस का खराब प्रदर्शन (70 सीटों में से केवल 19 जीतना) RJD की अधिक सीटें देने की अनिच्छा को बढ़ा रहा है।

छोटे सहयोगियों की बेचैनी

जबकि RJD ने अपने बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को सिंबल जारी कर दिए हैं, छोटे सहयोगियों के लिए सीटों का आवंटन अत्यधिक विवादित बना हुआ है।

CPI(ML) Liberation: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन, जो 2020 में अच्छा प्रदर्शन करने वाला एक महत्वपूर्ण साझीदार है, कथित तौर पर आनुपातिक संख्या में सीटों की मांग कर रहा है।

VIP की नाराजगी: मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) भी कथित तौर पर असहज है, क्योंकि उनका हिस्सा कम किया जा रहा है और उन्हें कथित तौर पर केवल लगभग एक दर्जन सीटें ही दी जा रही हैं।

गठबंधन के भीतर ‘दोस्ताना टकराव’

महागठबंधन के भीतर अव्यवस्था के स्पष्ट संकेत के रूप में, कई निर्वाचन क्षेत्रों में, जिनमें बछवाड़ा और राजापाकर जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं, अलग-अलग महागठबंधन पार्टियों के उम्मीदवारों ने एक-दूसरे के खिलाफ नामांकन दाखिल किए हैं।

हालांकि गठबंधन के नेता इन्हें नाम वापसी की अवधि के दौरान हल की जाने वाली अस्थायी ओवरलैप बताते हुए खारिज करते हैं, लेकिन यह अंतिम मिनट की भ्रम की स्थिति को रेखांकित करता है।

एनडीए की एकजुटता

इसके विपरीत, बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने एक एकजुट मोर्चा पेश किया है। एनडीए ने जल्द ही JD(U) (दोनों के लिए 101 सीटें), LJP (राम विलास), RLM, और HAM के साथ औपचारिक सीट-बंटवारे समझौते की घोषणा कर दी।

बीजेपी अब महागठबंधन की सार्वजनिक कलह का आक्रामक रूप से लाभ उठा रही है, जिससे सार्वजनिक विमर्श एनडीए के अपने आंतरिक तनावों के बजाय विपक्षी अंतर्कलह पर केंद्रित हो जाए।

चुनाव की तैयारी

जेएमएम का बाहर निकलना बीजेपी को चुनाव से पहले विपक्ष की चुनौती की विश्वसनीयता और सामंजस्य पर सवाल उठाने का एक शक्तिशाली उपकरण प्रदान करता है।

मतदान की तिथियां

बिहार में दो चरणों में मतदान होगा:

  • पहला चरण: 6 नवंबर (121 सीटें)
  • दूसरा चरण: 11 नवंबर
  • मतगणना: 14 नवंबर

पहले चरण में 243 में से कुल 121 सीटों पर मतदान होगा, जो 6 नवंबर को है।

शेयर करें :