बेंगलुरु में एक अत्यधिक चौंकाने वाला आपराधिक मामला सामने आया है, जिसने चिकित्सा जगत को स्तब्ध कर दिया है। लगभग छह महीने पहले जिस घटना को एक युवा त्वचा विशेषज्ञ (dermatologist) की “स्वाभाविक मौत” माना गया था, उसने अब एक भयावह मोड़ ले लिया है—मृतक के पति, जो स्वयं एक डॉक्टर हैं, को उनकी कथित हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
खबर की मुख्य बातें:
- डॉ. महेंद्र रेड्डी जी एस को 14 अक्टूबर को मनीपाल में गिरफ्तार किया गया
- पत्नी डॉ. कृतिका एम रेड्डी (29) की 24 अप्रैल 2025 को हुई थी मौत
- प्रोपोफोल (Propofol) एनेस्थीसिया की अत्यधिक मात्रा से हुई श्वसन विफलता
- FSL रिपोर्ट ने प्रोपोफोल के निशान की की पुष्टि
- तीन दिनों तक लगातार दिए गए थे IV infusions
- पति ने शव परीक्षण से बचने की की थी कोशिश
- निजी अस्पताल खोलने के लिए की जा रही थी पैसों की मांग
- BNS 2023 की धारा 103 के तहत दर्ज मामला
मुख्य आरोपी और पीड़ित
डॉ. महेंद्र रेड्डी जी एस, जो एक जनरल सर्जन हैं और विक्टोरिया अस्पताल में फेलोशिप कर रहे थे, उन्हें 14 अक्टूबर, 2025 को मनीपाल में हिरासत में लिया गया है। उन पर अपनी पत्नी, डॉ. कृतिका एम रेड्डी की सोची-समझी हत्या (premeditated killing) का आरोप है, जिनकी मृत्यु 24 अप्रैल, 2025 को हुई थी। डॉ. कृतिका 29 वर्ष की थीं।
एनेस्थीसिया से हत्या का तरीका
डॉ. कृतिका मुन्नेकोलाला, मराठाहल्ली स्थित अपने घर पर मृत पाई गई थीं। शुरुआत में, डॉ. महेंद्र रेड्डी ने दावा किया था कि उनकी मृत्यु पाचन संबंधी समस्याओं और निम्न रक्त शर्करा (low blood sugar) की जटिलताओं के कारण हुई।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि डॉ. महेंद्र रेड्डी ने कथित तौर पर अपनी चिकित्सा विशेषज्ञता का फायदा उठाया और उन्हें प्रोपोफोल (Propofol) नामक एक नियंत्रित एनेस्थेटिक दवा दी। पुलिस के अनुसार, प्रोपोफोल की अत्यधिक मात्रा के कारण श्वसन विफलता (respiratory failure) हुई, जिससे उनकी मौत हो गई।
शव परीक्षण (post-mortem) और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्टों ने प्रोपोफोल के निशान की पुष्टि की, जिसने स्वाभाविक मृत्यु के शुरुआती अनुमानों को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त सीमंथ कुमार सिंह ने पुष्टि की कि FSL रिपोर्ट आने के बाद ही यह पता चला कि मृतक को अत्यधिक मात्रा में प्रोपोफोल दिया गया था। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि मृत्यु अत्यधिक शामक (excessive sedative) के कारण हुई थी।
संदेह के घेरे में पति का व्यवहार
जांचकर्ताओं के अनुसार, महेंद्र रेड्डी ने अपनी पत्नी को लगातार तीन दिनों तक IV infusions दिए थे, यह दावा करते हुए कि वह गैस्ट्रिक समस्याओं के लिए ऐसा कर रहे थे।
23 अप्रैल को वह बेहोश हो गईं और उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने वहाँ 72 घंटे के उपवास परीक्षण (fasting test) की सिफारिश की थी, लेकिन महेंद्र रेड्डी ने कथित तौर पर उन्हें केवल 36 घंटे के बाद ही अस्पताल से छुट्टी दिला दी। इसके तुरंत बाद उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि डॉ. महेंद्र रेड्डी शव परीक्षण से बचने पर अड़े हुए थे, जिसने तुरंत संदेह पैदा किया। परिवार की लगातार अपील के बाद जांच फिर से खोली गई। शुरुआत में 24 अप्रैल को दर्ज की गई अप्राकृतिक मृत्यु रिपोर्ट (UDR) को FSL निष्कर्षों के बाद हत्या के मामले में बदल दिया गया।
वित्तीय और व्यक्तिगत मकसद
जांचकर्ताओं का मानना है कि इस कथित हत्या के पीछे का मकसद वित्तीय और व्यक्तिगत था।
वित्तीय मांगें: डॉ. कृतिका के पिता, श्री मुनि रेड्डी के, ने आरोप लगाया है कि महेंद्र लगातार एक निजी अस्पताल खोलने के लिए उनसे पैसों की मांग करते थे, जबकि परिवार पहले ही दंपति के लिए एक क्लिनिक को वित्तपोषित कर चुका था।
अन्य आरोप: महेंद्र पर विवाहेतर संबंध (extramarital affairs), दहेज़ उत्पीड़न (dowry harassment), और घरेलू दुर्व्यवहार (domestic abuse) के भी आरोप हैं।
छिपाई गई जानकारी: जांच में यह भी सामने आया कि महेंद्र रेड्डी और उनके जुड़वां भाई डॉ. नागेंद्र रेड्डी जी एस, और डॉ. राघवा रेड्डी जी एस पर 2018 में धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी का एक मामला दर्ज था। अप्रैल 2023 में इन मामलों को वापस लेने के लिए एक समझौता आदेश जारी किया गया था। यह महत्वपूर्ण जानकारी कथित तौर पर मई 2024 में शादी से पहले डॉ. कृतिका से छिपाई गई थी।
गिरफ्तारी और कानूनी स्थिति
FSL रिपोर्ट सामने आने और मृतक के पिता द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद, डॉ. महेंद्र रेड्डी को गिरफ्तार किया गया। एफआईआर दर्ज होने के तीन घंटे के भीतर उनकी गिरफ्तारी हुई। वह वर्तमान में मराठाहल्ली पुलिस द्वारा गहन पूछताछ से गुजर रहे हैं।
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS), 2023 की धारा 103 के तहत दर्ज किया गया है। इस धारा के तहत हत्या के लिए आजीवन कारावास (life imprisonment) या मृत्युदंड (death penalty) की सज़ा का प्रावधान है।






