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Amar Gupta
हार्वर्ड हेल्थ स्टडी के मुताबिक, जब कोई शख्स लाइट्स ऑन करके या एकदम डिम करके भी सोता है तो उसकी इंटरनल क्लॉक यानी सर्केडियन रिदम बिगड़ जाती है।
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जो लोग सोते समय अधिक एम्बिएंट लाइट में रहते हैं, उनमें हृदय-संबंधी बीमारियों का खतरा बहुत अधिक होता है। यह खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना ज्यादा पाया गया है।
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अन्य स्टडी के मुताबिक, सोते समय मॉडरेट-लाइट में रहने से हृदय-गति बढ़ जाती है। रात में हार्ट रेट का बढ़ना हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है।
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लाइट में सोने से मेलाटोनिन हार्मोन की कमी होती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और ब्लड शुगर लेवल भी बिगड़ने लगता है। इससे वजन बढ़ने और डायबिटीज का भी खतरा रहता है।
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नाइट लैंप, टीवी की रोशनी, मोबाइल स्क्रीन या खिड़की से आने वाली स्ट्रीट लाइट - किसी भी तरह की लाइट नींद के दौरान शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।
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बच्चे जो रात में लाइट जलाकर सोते हैं, उनमें बड़े होने पर मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी प्रभावित होता है।
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डॉक्टर्स की सलाह है कि रात में गहरी और अच्छी नींद के लिए कमरे को पूरी तरह अंधेरा रखें। ब्लैकआउट पर्दे लगाएं, सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बंद करें और स्वस्थ हृदय के लिए पूर्ण अंधेरे में सोएं।
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