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हांगकांग आग त्रासदी: वांग फुक कोर्ट में 44 मौतें, 300 लापता; गैर-जिम्मेदाराना निर्माण कार्य पर 3 गिरफ्तार

हांगकांग के ताई पो जिले में स्थित वांग फुक कोर्ट आवासीय परिसर में लगी भीषण आग (ब्लेज़) ने देश को झकझोर कर रख दिया है। यह त्रासदी हांगकांग के इतिहास में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे घातक आग की घटना बन गई है। नवीनतम जानकारी के अनुसार, इस विशाल अग्निकांड में कम से कम 44 लोगों की मौत हो गई है, जबकि लगभग 300 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

खबर की मुख्य बातें:

  • वांग फुक कोर्ट में भीषण आग, 44 की मौत पुष्टि
  • लगभग 300 लोग अभी भी लापता
  • 15 घंटे से अधिक समय तक 32 मंजिला टावरों में आग
  • असुरक्षित मचान और फोम सामग्री कारण
  • निर्माण कंपनी के 3 अधिकारी गिरफ्तार

यह घटना बुधवार दोपहर को शुरू हुई और 15 घंटे से अधिक समय तक कई 32 मंजिला टावरों में आग की लपटें दिखाई देती रहीं। गुरुवार की सुबह तक भी कई ब्लॉक से घना धुआँ निकल रहा था और स्थितियाँ बेहद खतरनाक बनी हुई थीं।

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लापरवाही के कारण आग का तेजी से फैलना

पुलिस और अधिकारियों की शुरुआती जाँच से पता चलता है कि आग इतनी तेजी से क्यों फैली और इतना बड़ा विनाश क्यों हुआ। अधिकारियों ने एक निर्माण कंपनी के तीन वरिष्ठ सदस्यों को संदिग्ध गैर-इरादतन हत्या (suspected manslaughter) के आरोप में गिरफ्तार किया है।

जाँचकर्ताओं ने संकेत दिया है कि आग तेजी से फैलने का मुख्य कारण असुरक्षित मचान सामग्री (unsafe scaffolding materials) और नवीनीकरण के दौरान उपयोग किए गए फोम इंस्टॉलेशन थे।

पुलिस अधिकारियों ने खुलासा किया कि प्रभावित इमारतें हरे रंग के निर्माण जाली (construction mesh) और प्लास्टिक की चादर में लिपटी हुई थीं, जो अग्नि-सुरक्षा मानकों (fire-safety standards) को पूरा नहीं करती होंगी। एक अप्रभावित ब्लॉक में, जाँचकर्ताओं को खिड़कियों पर फोम सामग्री से सील मिली, एक ऐसी स्थापना जिसे कथित तौर पर अब जाँच के दायरे में आई नवीनीकरण फर्म द्वारा किया गया था।

हांगकांग पुलिस अधीक्षक एलीन चुंग के हवाले से बताया गया है कि अधिकारियों का मानना है कि कंपनी ने “घोर लापरवाही” (gross negligence) बरती, जिससे आग अनियंत्रित रूप से फैल गई और जान-माल का भारी नुकसान हुआ। इस फर्म के दो निदेशकों और एक इंजीनियरिंग सलाहकार को हिरासत में लिया गया है।

बचाव अभियान और व्यापक प्रभाव

यह आग ताई पो जिले के वांग फुक कोर्ट परिसर के कई अपार्टमेंट ब्लॉकों में फैल गई। आग बुझाने वाले कर्मियों ने ऊपरी मंजिलों में फँसे निवासियों तक पहुँचने के लिए पूरी रात जूझते रहे। प्रभावित चार ब्लॉक पर आंशिक रूप से नियंत्रण पा लिया गया था, लेकिन तीन अन्य ब्लॉकों में अभियान जारी रहा।

मृतकों में एक अग्निशमनकर्मी भी शामिल है, और कम से कम 45 लोग गंभीर स्थिति में हैं।

यह त्रासदी 1996 के कोवलून वाणिज्यिक भवन अग्निकांड से भी बड़ी है, जिसने 41 लोगों की जान ले ली थी। विनाश की भयावहता की तुलना 2017 में लंदन के ग्रेनफेल टॉवर आपदा से की जा रही है, जहाँ ज्वलनशील क्लैडिंग और नियामक विफलताओं के कारण 72 मौतें हुई थीं।

सरकारी प्रतिक्रिया और शहर पर प्रभाव

हांगकांग के मुख्य कार्यकारी जॉन ली ने कहा कि सरकार का तत्काल ध्यान शेष आग को बुझाने और अभी भी फँसे हुए लोगों को बचाने पर केंद्रित है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग से स्थिति पर निगरानी रखते हुए, राज्य प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार, आग पर काबू पाने और हताहतों को कम करने के लिए “हर संभव प्रयास” (all-out effort) करने का आह्वान किया है।

इस अग्निकांड ने पूरे शहर में महत्वपूर्ण व्यवधान भी पैदा किया है। दर्जनों सड़कें सील कर दी गईं, 39 बस मार्गों को बदल दिया गया, और अवरुद्ध पहुँच और भारी भीड़भाड़ के कारण कम से कम छह स्कूलों को बंद करने की घोषणा की गई।

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Amar Gupta

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