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दिल्ली प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट की ‘गंभीर’ टिप्पणी, कहा- मास्क भी नाकाफी; जानिए स्वास्थ्य जोखिम और सरकार पर दबाव

दिल्ली प्रदूषण: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता पिछले कई दिनों से चिंता का विषय बनी हुई है। गुरुवार की सुबह दिल्ली एक बार फिर घने स्मॉग (धुंध) की मोटी चादर में लिपटी दिखी। यह लगातार तीसरा दिन था जब शहर की वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में बनी रही।

खबर की मुख्य बातें:

  • दिल्ली की वायु गुणवत्ता लगातार तीसरे दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मास्क भी पर्याप्त नहीं, स्थायी क्षति होगी
  • बवाना में सबसे अधिक 460 AQI दर्ज
  • SC ने पंजाब-हरियाणा को पराली डेटा देने का आदेश
  • 17 नवंबर को अगली सुनवाई तय

इस भयावह स्थिति पर संज्ञान लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि केवल मास्क पहनना भी पर्याप्त नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

शीर्ष अदालत ने वायु प्रदूषण की स्थिति को “बहुत गंभीर” बताया है। सुनवाई के दौरान, जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने वरिष्ठ वकीलों को संबोधित करते हुए तीखे लहजे में सवाल किया कि वे शारीरिक रूप से अदालत में क्यों पेश हो रहे हैं, जबकि वर्चुअल सुनवाई (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) की सुविधा उपलब्ध है।

जस्टिस नरसिम्हा ने जोर देकर कहा, “आप सब यहाँ क्यों पेश हो रहे हैं? हमारे पास वर्चुअल सुनवाई की सुविधा है। कृपया इसका लाभ उठाएँ। यह प्रदूषण – यह स्थायी क्षति का कारण बनेगा”। उन्होंने आगे चेतावनी दी, “मास्क भी पर्याप्त नहीं हैं। यह काफी नहीं होगा। हम मुख्य न्यायाधीश के साथ भी इस पर चर्चा करेंगे”।

वायु गुणवत्ता का खतरनाक स्तर

‘गंभीर’ श्रेणी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अपने आप में एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम दर्शाता है। यह स्थिति स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी गंभीर जोखिम पैदा करती है, और पहले से ही श्वसन या हृदय संबंधी समस्याओं वाले लोगों को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति बहुत विकट बनी हुई है। सुबह 8 बजे कई प्रमुख निगरानी स्टेशनों पर खतरनाक AQI रीडिंग दर्ज की गई थीं:

  • बवाना में सबसे अधिक 460 AQI
  • चांदनी चौक (455)
  • रोहिणी (447)
  • आईटीओ (438)
  • मुंडका (438)
  • नरेला (432)
  • आनंद विहार (431)
  • नॉर्थ कैंपस डीयू (414)

पराली जलाने का मुद्दा और कोर्ट का निर्देश

राजधानी और उससे सटे शहरों में इस जहरीले धुंध के पीछे प्रमुख योगदान पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने (crop residue burning) का जारी रहना है।

इस खतरे को देखते हुए, शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा राज्यों को पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत डेटा जमा करने का निर्देश दिया था।

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के नेतृत्व वाली पीठ ने इन राज्य प्रशासनों को इस क्षेत्र में लगातार वायु गुणवत्ता में गिरावट के लिए जवाबदेह ठहराया। पीठ ने प्रवर्तन (enforcement) और नीतिगत कार्रवाई के ठोस सबूतों की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे काउंसलों को एक सप्ताह के भीतर प्रासंगिक डेटा जुटाकर पेश करने का निर्देश दिया गया है।

जैसे ही इस सप्ताह की शुरुआत में दिल्ली का AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में चला गया, राज्य counsel ने अदालत से मामले को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। जवाब में, मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि मामले पर अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

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Amar Gupta

F96 News की संपादकीय टीम देश-विदेश की ताज़ा और सटीक खबरें 24x7 आप तक पहुंचाती है।