तारकेश्वर में 4 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म, पुलिस पर लापरवाही के आरोप

बंगाल के तारकेश्वर रेलवे स्टेशन के पास 4 वर्षीय बच्ची का मच्छरदानी काटकर अपहरण कर यौन उत्पीड़न किया गया। बच्ची बाद में खून से लथपथ निर्वस्त्र मिली। परिवार ने अस्पताल और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। सार्वजनिक आक्रोश और विरोध प्रदर्शन (Protests) के बाद POCSO के तहत FIR दर्ज की गई।
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पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर इलाके में एक चार वर्षीय बच्ची के अपहरण और कथित यौन उत्पीड़न की अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। शनिवार, 9 नवंबर, 2025 को घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया और पुलिस एवं चिकित्सा अधिकारियों की कथित लापरवाही के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए।

खबर की मुख्य बातें:

  • तारकेश्वर रेलवे स्टेशन परिसर के पास सो रही 4 वर्षीय बच्ची का अपहरण
  • आरोपी ने मच्छरदानी काटकर बच्ची को उठाया
  • बच्ची नाले के पास खून से लथपथ अवस्था में मिली
  • तारकेश्वर ग्रामीण अस्पताल में प्राथमिक उपचार
  • पुलिस पर FIR दर्ज न करने के आरोप
  • परिवार को वापस जाने के लिए कहने का आरोप
  • POCSO अधिनियम के तहत FIR दर्ज
  • BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन
  • शुभेंदु अधिकारी ने ममता सरकार पर साधा निशाना
  • विधायक ने बताया “सुरक्षा विफलता”

घटना का विवरण

पीड़ित बच्ची का परिवार तारकेश्वर रेलवे स्टेशन परिसर के पास शरण लिए हुए था। शुक्रवार को यह घटना तब हुई जब बच्ची अपने माता-पिता और नानी के पास एक मच्छरदानी के नीचे सो रही थी।

शिकायत के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर मच्छरदानी काटकर बच्ची को वहां से उठा लिया और उसका यौन उत्पीड़न किया।

बच्ची की खोज

सुबह जब बच्ची गायब मिली तो दहशत फैल गई। घंटों की खोजबीन के बाद, परिवार के सदस्यों ने बच्ची को उसी दिन दोपहर बाद स्टेशन के बगल में एक नाले के पास खून से लथपथ अवस्था में निर्वस्त्र पाया।

भाजपा की आरामबाग जिला सचिव पर्णा आदक ने घटना की भयावहता बताते हुए कहा कि बच्ची के गाल पर काटने के निशान थे, और घंटों के उपचार के बावजूद उसके गुप्तांगों से खून बह रहा था।

पुलिस और अस्पताल पर लापरवाही के आरोप

बच्ची को तुरंत तारकेश्वर ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार प्रदान किया और बाद में उसे छुट्टी दे दी।

अस्पताल प्रशासन पर आरोप

परिवार ने अस्पताल कर्मचारियों पर मामले को संभालने में लापरवाही बरतने और तुरंत पुलिस को सूचित करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

पुलिस स्टेशन में क्या हुआ?

इससे भी अधिक गंभीर आरोप तब लगे जब परिवार पुलिस स्टेशन पहुंचा। परिवार ने शिकायत की कि जब वे शिकायत दर्ज कराने गए, तो अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें वापस जाने के लिए कह दिया

परिवार के रोष और जनता के आक्रोश के बाद ही पुलिस ने बच्ची को आगे की मेडिकल जांच के लिए वापस अस्पताल बुलाया।

विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रिया

पुलिस की कथित निष्क्रियता और सार्वजनिक विरोध के चलते, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और डॉक्टरों दोनों पर लापरवाही का आरोप लगाया।

शुभेंदु अधिकारी की तीखी प्रतिक्रिया

बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता, शुभेंदु अधिकारी, ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने ममता बनर्जी सरकार की आलोचना करते हुए उन्हें “विफल मुख्यमंत्री” कहा।

अधिकारी ने X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि तारकेश्वर पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही थी और “सत्य को दबाकर” राज्य की ‘नकली कानून व्यवस्था की छवि’ को बचाने में व्यस्त थी। उन्होंने पुलिसकर्मियों को ममता बनर्जी का “चापलूसी करने वाला” बताया जो कानून को बनाए रखने की अपनी शपथ भूल गए हैं।

प्रशासन का पक्ष और कार्रवाई

वहीं, तारकेश्वर के विधायक रामेंदु सिंघा रॉय ने घटना को “अत्यंत अफसोसजनक” बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र की देखरेख करने वाली रेलवे पुलिस की ओर से एक “सुरक्षा विफलता” थी।

विधायक का स्पष्टीकरण

सिंघा रॉय ने पुलिस की निष्क्रियता के आरोपों को आंशिक रूप से खारिज करने का प्रयास करते हुए कहा कि हो सकता है कि परिवार चिकित्सा उपचार को लेकर भ्रम की स्थिति के कारण पुलिस स्टेशन से जल्दी चला गया हो, लेकिन प्रशासन ने बाद में सभी आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की।

POCSO के तहत FIR

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस गंभीर मामले में POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) के तहत एक FIR दर्ज कर ली गई है।

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