पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव तब और बढ़ गया जब काबुल में एक ‘क्रॉस-बॉर्डर एयरस्ट्राइक’ को अंजाम दिया गया, जिसका निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के प्रमुख नूर वली महसूद थे। यह घटना एक उच्च-मूल्य वाले पाकिस्तानी आतंकवादी को निशाना बनाने वाली थी, जो गुप्त, सीमा पार ऑपरेशन का स्पष्ट संकेत देती है।
खबर की मुख्य बातें:
- 10 अक्टूबर को काबुल में दो शक्तिशाली विस्फोट और लड़ाकू जेट की आवाज़
- TTP प्रमुख नूर वली महसूद का सेफहाउस था टारगेट
- महसूद सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके बेटे की हुई मौत
- महसूद ने वॉयस मैसेज में कहा – “मैं सुरक्षित हूं और पाकिस्तान में हूं”
- पाक रक्षा मंत्री के आरोपों के 48 घंटे बाद हुआ हमला
- तालिबान ने इसे अफगान संप्रभुता का उल्लंघन बताया
- TTP की ‘शूरा’ में आंतरिक संकट की आशंका
- अफगान विदेश मंत्री मुत्ताकी भारत दौरे पर, जयशंकर-डोभाल से होगी मुलाकात
काबुल में विस्फोट और लड़ाकू जेट की गड़गड़ाहट
10 अक्टूबर, 2025 को काबुल को दो शक्तिशाली विस्फोटों और उसके बाद स्वचालित गोलियों की आवाज़ से हिला दिया गया। अनेक चश्मदीदों ने शहर के हवाई क्षेत्र में एक लड़ाकू जेट के उड़ने की आवाज़ आने की सूचना दी।
शीर्ष खुफिया सूत्रों ने बताया कि यह घटना पूर्वी काबुल में स्थित TTP और अल-कायदा के सेफहाउस को लक्षित करते हुए किया गया एक हवाई हमला थी, जहाँ TTP प्रमुख नूर वली महसूद कथित तौर पर काम कर रहे थे।
TTP चीफ की स्थिति और हमले का परिणाम
सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि यह हमला सफलतापूर्वक परिसर को निशाना बनाने में कामयाब रहा। हालाँकि, CNN-News18 को नूर वली महसूद का एक वॉयस मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें उन्होंने पुष्टि की कि वह सुरक्षित हैं और पाकिस्तान में हैं। यह जानकारी हमले की पुष्टि होने के बावजूद सामने आई।
दुर्भाग्य से, महसूद के वॉयस मैसेज के अनुसार, इस हमले में उनके बेटे की मौत हो गई।
प्रतिशोधी हमला और संप्रभुता का उल्लंघन
सूत्रों के अनुसार, यह घटना अत्यधिक उकसाने वाली है। यह हमला 2021 में तालिबान के सत्ता संभालने के बाद पहली बार पाकिस्तान की काबुल के अंदर हमला करने की इच्छा को दर्शाता है।
इस हमले का समय महत्वपूर्ण है: यह पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा अफगानिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए जाने के 48 घंटों के भीतर हुआ। यह समयरेखा दृढ़ता से प्रतिशोधी हमले की ओर इशारा करती है।
सूत्रों का सुझाव है कि यह हमला या तो सीधे पाकिस्तान द्वारा किया गया था, या फिर इस्लामाबाद के महत्वपूर्ण खुफिया इनपुट और संभावित जमीनी सहायता के साथ किसी तीसरे पक्ष की शक्ति द्वारा अंजाम दिया गया।
तालिबान के करीबी सूत्रों द्वारा इस कार्य को अफगान संप्रभुता का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। तालिबान की सीमित वायु रक्षा क्षमताओं और पूर्व अफगान वायु सेना की अनुपस्थिति को देखते हुए, कथित तौर पर पाकिस्तानी मूल के जेट और बाहरी तकनीकी सहायता वाले इस तरह के हमले को एक गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
TTP में आंतरिक संकट और सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव
महसूद के परिवार को निशाना बनाकर किए गए इस कथित हमले से TTP की ‘शूरा’ (Shura) के भीतर एक बड़ा आंतरिक संकट पैदा हो सकता है। TTP की यह आंतरिक नेतृत्व परिषद पहले से ही काबुल-समर्थक और रावलपिंडी-समर्थक गुटों के बीच विभाजित है।
सुरक्षा विश्लेषकों को इस बात का डर है कि हमले के परिणामस्वरूप पैदा हुई रिक्ति (vacuum) और आंतरिक संघर्ष कुनार, नंगरहार और पक्तिका के सीमावर्ती क्षेत्रों में फैल सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो इससे पाकिस्तान और तालिबान के नेतृत्व वाली अफगान सरकार के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध और अधिक तीव्र हो सकते हैं।
भारत की यात्रा के दौरान हमला
यह हवाई हमला एक महत्वपूर्ण राजनयिक समय पर हुआ है। घटना तब हुई जब अफगानिस्तान के अंतरिम विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी आठ दिवसीय यात्रा पर भारत में हैं।
अपनी यात्रा के दौरान, मुत्ताकी विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के साथ अलग-अलग वार्ता करने वाले हैं।









