मध्य प्रदेश में ज़हरीली खांसी की सिरप से बच्चों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। तमिलनाडु स्थित सरेसन फार्मा (Sresan Pharma) के मालिक एस रंगनाथन को चेन्नई में गिरफ्तार कर लिया गया है। रंगनाथन की गिरफ्तारी बुधवार देर रात हुई है, यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश में ‘कोल्ड्रिफ’ (Coldrif) नामक खांसी की सिरप से जुड़ी कई बच्चों की मौतों के बीच हुई है।
खबर की मुख्य बातें:
- सरेसन फार्मा के मालिक एस रंगनाथन चेन्नई के अशोक नगर में गिरफ्तार
- MP में अब तक 20 बच्चों की मौत ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप से
- सिरप में ज़हरीले रसायन से किडनी फेलियर के मामले
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 276 और 27ए के तहत केस दर्ज
- 10 राज्यों में ‘कोल्ड्रिफ’ पर प्रतिबंध लगाया गया
- छिंदवाड़ा में 5 मेडिकल स्टोर सील किए गए
- केंद्रीय औषधि निकाय ने लाइसेंस रद्द करने को कहा
- सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
यह गंभीर मामला तब सामने आया जब सरेसन फार्मा द्वारा निर्मित ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप के सेवन के कारण कई बच्चों की जान चली गई।
गिरफ्तारी का विवरण
मध्य प्रदेश पुलिस ने रंगनाथन को गिरफ्तार करने के लिए चेन्नई और कांचीपुरम में एक टीम भेजी थी। रंगनाथन को चेन्नई के अशोक नगर इलाके में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस टीम ने भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 105 और 276, और 27ए अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के बाद चेन्नई का दौरा किया था। चूंकि रंगनाथन आर3 अशोक नगर पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर रहते थे, इसलिए एमपी पुलिस टीम ने चेन्नई पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद उन्हें उनके आवास पर गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद, रंगनाथन को कफ सिरप की कांचीपुरम फैक्ट्री ले जाए जाने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य संकट
सरेसन फार्मा द्वारा निर्मित कथित ‘कोल्ड्रिफ’ खांसी की सिरप के सेवन से मध्य प्रदेश में अब तक 20 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिससे राज्य एक बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है।
चिकित्सा जांचों से पता चला है कि ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप में ज़हरीले रसायन थे जिन्होंने बच्चों की किडनी को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया। सिरप के सेवन के कुछ ही घंटों के भीतर गुर्दे की विफलता (renal failure) के लक्षण दिखने लगे, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य में तेज़ी से गिरावट आई।
सरकार और नियामक प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बुधवार को छिंदवाड़ा में मीडिया से बात करते हुए आश्वासन दिया कि सरकार न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है, और उन्होंने यह भी बताया था कि रंगनाथन को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की एक टीम तमिलनाडु भेजी गई थी।
इस त्रासदी के बाद व्यापक आक्रोश फैलने के कारण, ‘कोल्ड्रिफ’ खांसी की सिरप पर देश के कई राज्यों में प्रतिबंध लगा दिया गया। यह प्रतिबंध पंजाब, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लागू किया गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई
इस बीच, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज़ कर दी है। प्रशासन ने पांच मेडिकल स्टोरों को सील कर दिया है और सिरप के नमूनों को प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा है।
साथ ही, गांवों में सार्वजनिक घोषणाएं की जा रही हैं, जिसमें माता-पिता को बच्चों को कोई भी खांसी की सिरप न देने की चेतावनी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय औषधि निकाय (Central Drugs Body) ने तमिलनाडु से ‘कोल्ड्रिफ’ बनाने वाले निर्माता का लाइसेंस रद्द करने को कहा है।
कानूनी जांच और प्रणालीगत सुधार की मांग
मामले में डॉक्टरों के कथित तौर पर गलत फंसाए जाने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने चिंता व्यक्त की है। कुछ निजी चिकित्सक, जिनमें प्रवीण सोनी भी शामिल हैं, सिरप निर्धारित करने या देने के लिए जांच के दायरे में हैं।
इन मौतों के मद्देनजर, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है, जिसमें जांच और दवा सुरक्षा तंत्र में प्रणालीगत सुधार की मांग की गई है।
अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर इस पीआईएल में घटनाओं की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है और सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति के गठन पर जोर दिया गया है।






